मीरा में 'म' और 'र' दो अश्रर होते है, मेरे भी नाम में 'म' और र'अश्रर होते है , मीरा- रानी थी, वो उस समय की ,महलो की , में हूँ , मंजू रानी , अपने ही घर की ,
मीरा में मेरा मन कब लग गया, ये मुझे खुद पता नही, कृष्णा से सब प्रेम करे , मीरा को क्यों अन्देख करे , बिना मीरा न जाने कोई गिरिघर , नारी से पहेचाने नर को ये , क्यों न रित हम शरू करे,
गत 18 नवम्बर 2017 को दिल्ली विश्वविद्यालय का 94 वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया. जिसमें मंजू रानी को 'विद्यावाचस्पति' की उपाधि प्रदान की गयी. समारोह की कुछ झलकियाँ प्रस्तुत हैं.
मीरा बनाना चाहती हूँ में ,
ReplyDeleteक्या कोई कृष्णा बन सकता है ?
प्रेम में विष पीना चाहती हूँ में ,
क्या कोई विष की राह पर ले जा सकता है?
मीरा में 'म' और 'र' दो अश्रर होते है,
ReplyDeleteमेरे भी नाम में 'म' और र'अश्रर होते है ,
मीरा- रानी थी, वो उस समय की ,महलो की ,
में हूँ , मंजू रानी , अपने ही घर की ,
मीरा मेरी यात्रा है,
ReplyDeleteदूर तक मुझे जाना है ,
साथ चाहिए बस किस्मत का ,
तन -मन से डूब जाना है,
This comment has been removed by the author.
ReplyDeleteमीरा में मेरा मन कब लग गया,
ReplyDeleteये मुझे खुद पता नही,
कृष्णा से सब प्रेम करे ,
मीरा को क्यों अन्देख करे ,
बिना मीरा न जाने कोई गिरिघर ,
नारी से पहेचाने नर को ये ,
क्यों न रित हम शरू करे,
राधे-राधे सब सब बोलते है
ReplyDeleteमीरा -मीरा कब बोलेगे ,त्याग ,
सहेंनशीलता की मूर्ति को कब इस जग में लोग सराहेगे ?